Saturday, December 05, 2015

आपके प्रति लोगो का नजरिया

हमारा व्यवहार व कार्य हमारे व्यकतित्व की किताब रूपी COVER (आवरण) के सामान होता है, अर्थात लोग आपकी किताब की बाहरी COVER (आवरण) को देख कर ही आपकी पूरी किताब का अंदाज़ा लगा लेते हैं. क्या इन्सान क्रोधी स्वाभाव का है अथवा दयालु, दुर्जन स्वाभाव का है अथवा सज्जन. आशावादी है या निरासवादी, सभी बाते आपके व्यवहार के द्वारा लोगो को ज्ञात हो जाता है.
लोगो का आपके प्रति नजरिया आपके व्यव्हार और चाल-चलन से निर्धारित होता है. हमारे हाव भाव और चाल चलन हमारे व्यक्तित्व को बहोत ज्यादा प्रभावित करता है. किसी भी इन्सान से पहली मुलाकात के कुछ ही मिनटों में उनके बातो और (Body Language) बॉडी लेंग्वेज से उनके व्यक्तित्व का अंदाज़ा लगाया जा सकता है .आज वही सफल इंसान है जो अपने व्यक्तित्व को सभी के सामने प्रभावपूर्ण ढंग से पेश कर सके. इसलिए आज के समय में शारीरिक भाषा अर्थात (Body Language) पर काफी फोकस किया जा रहा है. हमारा बॉडी लेंग्वेज ही हमारी व्यक्तित्व को एक साधारण इन्सान से अशधारण बना सकता है . चाहे हमारा शारीर की बनावट अथवा सुन्दरता जैसा भी हो, उनसे ज्यादा हमारा शारीरिक और मानसिक आत्मविश्वास ज्यादा प्रभावित करता है. मतलब की आप स्मार्ट हो तो आपके बाकि चीजो पर लोगो का ध्यान नहीं जायेगा.

हमारा शरीर एक मिटटी की कोई आकृति की सामान है चाहे यह आकृति जैसा भी हो पर इसे सुसस्जित नहीं किया जाए तो मात्र एक आकृति ही नजर आयेगा .जिस तरह एक बच्चा किसी मिटटी को विभिन्न तरह के आकारो और रूपों में ढाल कर उसे एक रूप और आकृति देता है, पर उस आकृति को जब तक रंग रोगन की बाहरी आवरण नहीं लगाया जाता, तब तक वह बेढंगा नजर आता है, यदि इस आकृति या ढांचा को अच्छी तरह से कोई रंग अथवा चित्र से सुसज्जित किया जाए तो यही एक खुबसूरत नमूना बन जाता है. मतलब यह है की हमारा शारीरिक दसा जैसा भी हो यदि इसे अपने बॉडी लैंग्वेज और व्यवहार से जब तक नहीं सजायेंगे तब तक हम मात्र एक साधारण इन्सान ही रहेंगे.

लोगो का हमारे प्रति नजरिया बॉडी लेंग्वेज से निर्धारित होता है, और बॉडी लेंग्वेज का निर्धारण अपने प्रति सोच या नजरिया से होता है, मतलब की हमारा नजरिया अपने प्रति कैसा है और हम अपने आप को लोगो के सामने किस रूप में पेश करना चाहता हैं, लोग आपको वही समझेंगे जैसा आप दिखाओगे. दोस्तों इस दुनिया में कई ऐसे लोग मिलेगे, जो अपने आप को लोगो के सामने हिन् भाव ग्रस्त निम्न दिखाते है. उसे लगत है ऐसा कर के वे लोगो की हमदर्दी पा लेंगे. पर ऐसा नहीं ,लोग आपको उसी नजर से देखना सुरु कर देते है. कई लोग अपने शारीरिक अक्षमता के कारण अथवा अपने धन या अपने स्वास्थ्य को लेकर या फिर अपने शिक्षा को लेकर अपने आप को ऐसा तुच्छ समझ लेते हैं की वे आदतन अपने आप को लोगो से कहते फिरते हैं की भाई हम ये नहीं कर सकते हम इस लायक नहीं. इस तरह वे अपने अन्दर के कमियों को लोगो के सामने दिखने लगते हैं, इससे होता यह है की लोग आप को सच में एक खामियां वाला इन्सान समझ लेते हैं. इसलिए कह सकते हैं की लोग आपको उसी रूप में देखेंगे जिस रूप में आप लोगो आपको अपने आप को पेश करोगे.

मैं भी एक 80 प्रतिशत विकलांग लड़का हूँ, पर लोगो के सामने अपने को ये नहीं दिखता की मेरे में कुछ कमियां हैं. मैं जनता हूँ मेरे में क्या कमी है, पर लोगो के सामने इसे जाहिर नहीं होने देता. मैं अपने  अत्विश्वास और बॉडी लैंग्वेज को ऐसा रखता हूँ, की लोगो का ध्यान मेरे शारीर से ज्यादा मेरे व्यक्तित्व पर फोकस हो जाता है. इसलिए मैं किसी भी रूप में अपने को आम लोगो से कम नहीं समझता. मैं ओ सब कर सकता हूँ जो एक साधारण इन्सान करता है. आखिर हमें क्या मिलेगा जो हम लोगो से अपनी कमजोरी को दिखाए? बस हमदर्दी के पात्र साबित होते है, और हमदर्दी केवल नाकामी को लाता है.

इसलिए दोस्तों अपने आप को लोगो के सामने ऐसा रखो की लोग आपके बातो से आपके व्यवहारों से आकर्षित होकर आपके कमियों को न देखें. और आपको एक पर्क्फेक्ट इन्सान समझ सके. चाहे आप का शरीर जैसा हो चाहे आप रोगी हो, अथवा विकलांग, चाहे आप कम पढ़े लिखे हो अथवा गरीब, ये सब मायने नहीं रखता, आप लोगो के सामने अपनी कमी को प्रदर्शित न होने दो. तभी लोग आपको पसंद करेंगे. क्योकि दुनिया केवल अच्छी वस्तु की ओर आकर्षित होते हैं, न की बुरे की ओर. अब अप समझ गए होंगे की आपको दुनिया के सामने कैसा बनना है, केवल अपने दुख का रोना नहीं रोना है, अपने आपको ऐसा रखो की सब आपको पसंद करें, और आपका किताब रूपी व्यक्तित्व की कवर ऐसा रखना की लोग आपके किताब को पढने को लालायित रहें.
---शब्बीर चौरसिया

Wednesday, August 05, 2015

कंजूसी उतना ही करो जितना आपको लाभ हो


नमस्कार दोस्तों. आज मैं आपके लिए एक नया लेख लिख रहा हूँ जो की हमारी खुशियों के बीच "दीवार" बनती है. जैसा की मेरे ब्लॉग का उद्देश्य कम शब्दों मे अधिक बात करना है. मैं चाहता हूँ की बात चाहे कितनी भी छोटी क्यों ना हो बस उन बातो का मतलब होना चाहिए. दोस्तों आज जो लेख लिखने जा रहा हूँ उस का शीर्षक कंजूसी पर है . हर इंसान की बस एक ही तमन्ना होती है, की उसे दुनिया की सारी खुशियाँ मिल जाए. इसलिये इंसान इतना मेहनत करता है, चाहे वह मेहनत पढ़ाई लिखाई से लेकर नौकरीपेशा आदि को करता हो. और इसका एक ही मकसद होता है की अधिक से अधिक खुशियाँ को प्राप्त करे. और इन सारी खुशियों का 80 प्रतिशत आधार पैसा या धन दौलत होता है, जिसके द्वारा इंसान स्वस्थय से लेकर अपनी हर खुशियों को खरीद सकता है . लेकिन यह हर व्यक्ति के लिए संभव नहीं होता .परन्तु इस दुनिया मे जो भी लोग है अपने जीवन व्यापन के लिए कुछ ना कुछ जरुर धन कमा लेता है , चाहे वह भिखारी ही क्यों ना हो. मतलब यह की जीवन जीने के लिए धन मिल ही जाता है .



चलो यह तो हुई धन प्राप्ति की बाते .असल बात यह है की इन्ही लोगो मे से कई ऐसे इंसान भी होते है जो अपनी खुशी को पूरा करने मे सक्षम होते हुए भी, उस खुशी को दबा कर रख देते है . कहने का तातपर्य यह है की, यदि आप किसी चीज को प्राप्त करने मे सक्षम है, और आपके पास प्रयाप्त धन भी उपलब्ध है, फिर भी आप उसे खर्च करने से पहले १० बार सोचते है की पैसे को अपने खुशी के लिए खर्च करू की नहीं. और इसी कश्मकश मे वह अपनी खुशी पूरी नहीं कर पता .उसे लागत है इन खुसियो के  बदले धन की क़ुरबानी देनी पड़ेगी. और वह उस पैसे के मोह मे अपनी खुशी का गला घोट देता है. और अपने मन को तसल्ली देता है की फलाना चीज की आवश्यकता मेरे लिए ज्यादा जरुरी नहीं है. सायद आप मेरे कहने का मतलब समझ गए होंगे. चलो फिर भी एक उदहारण देता हूँ -



एक ऐसा इंसान जिसे एक स्मार्ट मोबाइल फोन की चाहत है, और उनके पास उसे प्राप्त करने हेतु प्रयाप्त धन भी है .फिर भी वह उसे खर्च करने से पहले १० बर सोचेगा की क्या यह फोन लेना उचित है? क्योकि इससे मेरे पैसे फालतू मे चले जायेगे.. इस से अच्छा मैं कुछ और खरीद लू या फिर  पैसा जमा कर के रखे रहू ताकि किसी वक्त काम आये . और इस तरह वह अपने धन को बचत करने के चलते अपनी खुशी का गला घोट देता है, और सोचता है मैंने अपने पैसे बचा कर समझदारी की है, पर कुछ ही दिनों के बाद उसकी स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के चले उसे अपने ईलाज के लिए पैसे खर्च करने पड़ते हैं, और मन ही मन सोचता है की आज मैंने पैसे बचा लिए थे तो आज काम आ गया, वरना मोबाइल खरीद  लिया होता तो कहा से पैसे लाता ...हा हा हा --- है ना कितना मजेदार !


दोस्तों पैसे अपना मार्ग खुद बना लेता है .अगर आप चाहे कितना भी धन कमा लो य बचत कर लो वह खर्च होगा ही. वह किसी ना किसी रूप मे आपके हाथो से पैसा चला जायेगा. इसलिये इसे अपने खुशियों के बीच ना आने दो. जब आप अपनी खुशी पूरी करने मे सक्षम हो, तो उसे पूरी कर ही लेना चाहिए. क्योकि यह जीवन कब तक आपके साथ है, कोई नहीं जनता .आकस्मिक मौत हो जाने पर उन पैसो का कोई मोल नहीं होगा. माना की धन की बचत बहोत जरुरी है ,पर उतना भी जरुरी नहीं की आपकी अभिलाषा पूरी ना हो पाए. क्योकि इंसान इसीलिए तो कमाता है की वह दुनिया की हर चीज प्राप्त कर सके . और आपके पास पर्याप्त साधन है, तो कंजूसी क्यों करना. चाहे खाने पीने मे हो या लेन-देन हो. जीते-जी हर खुशी पूरी कर लो. क्या पता कल वह पल आपके जीवन मे आये की नहीं .
---शब्बीर चौरसिया 

Monday, June 01, 2015

सबसे आसान काम पैसा कमाना


इस दुनिया मे जो प्राणी जन्म लिया है, उन को जीवित रहने के लिए सारे आवशयक चीजे जैसे भोजन, पानी, हवा सभी चीजे उन्हें समय पर प्राकृतिक उन्हें खुद दे देती है. चाहे वह जैसी भी परिस्थिति मे क्यों न हो. इन बातो को मैंने अपने जीवन मे अनुभव किया है ..दुनिया मे बहोत से विकलांग लोग हैं, जिनकी शारीरिक दशा बहुत ही दानिय होती है. देखने से ऐसा लगता है की वे कैसे अपना जीवन व्यापन करते होंगे. परन्तु हर प्राणी के जन्म के साथ ही ईश्वर उनके मरते दम तक उनको सारे चीजे खुद-ब-खुद  देती है, बस मिलने का तरीका अलग-अलग होता है. उन्ही जीवन की आवश्यक चीजों मे एक चीज है पैसा अथवा धन. पैसा ऐसा चीज है जिसके बिना इंसान अपना जीवन की गाड़ी नहीं चला सकता. इस दुनिया मे प्रत्येक चीज पाने के लिए चाहे भोजन हो या स्वस्थ शारीर या फिर उपलब्धियां सभी के लिए पैसा बहुत अहम स्थान रखता है. जिसके अभाव मे साधारण जीवन की कल्पना करना नाममुकिन सा है. इसीलिए देखा गया है, की जो भी इंसान वयस्क होता है, तो उसे आगे की जीवन के लिए नौकरी अथवा पैसा कमाने के तरीके पर चिंता होने लगती है. और व्यक्ति रोजगार की तलास मे लग जाता है. कई ऐसे लोग भी होते है जो केवल नौकरी के तलास मे कुछ कर नहीं पाते. वह केवल पैसा य धन आने का जरिया केवल नौकरी को समझता है. और इसी चिंता मे वह कुछ भी नहीं कर पता .
मेरे अनुभव से मुझे यह लगता है, की इस दुनिया मे पैसा या धन कमाना सबसे आसान काम है. बस इंसान के पास जो कीमती धन है उसे बेचने का तरीका आना चाहिए. और यह धन इंसान को मुफ्त मे जन्म के साथ मिला होता है. आखिर क्या है यह धन?

सबसे पहले मैं अपने जीवन मे होने वाले इसके अनुभव के बारे में आपको बताना चाहता हूँ. जैसा की मैं मेडिकल रिपोर्ट के मुताबित मैं ८०% शारीरिक रूप से अक्षम लड़का हूँ. फिर भी मैंने पढ़ाई कर B.com, MA जैसे डिग्रियां हासिल किया. परन्तु मुझे अभी तक कोई नौकरी नहीं मिल पाया है. ऐसा नहीं की मैं नौकरी के लिए प्रयास नही करता. मैं अपने तरफ से कोसिस कर रहा हूँ. मेरे पास सन 2007 से कंप्यूटर है. और मैं स्वयं अपने आप से कंप्यूटर सिखा है. वैसे मेरे पास कंप्यूटर की PGDCA डिग्री भी है. जब मैं स्नातक B.com की पढ़ाई पूरी कर लिया तो, मुझे भी पैसे कमाने का मन होने लगा .सोचने लगा की कब मुझे नौकरी मिले, और मैं अपने दम पर अपना पॉकिट मनी का खर्च अपने पैसे से करू. मैं हमेसा सोचने लगा और बहुत ही चिंतित रहने लगा, की मेरा आगे क्या होगा. यदि नौकरी ना मिले तो कब तक अपने परिवार के पैसे से अपनी जरुरत को पूरी करू. मैं निराश होने लगा था . मैं जनता था की कही जा कर काम भी नही कर सकता था. 

एक दिन एक मेरे मामा जी आये. उसने मेरे कंप्यूटर ज्ञान को देख कर मुझे कहा की आप प्रिंटर खरीद लो और घर पर ही फोटो कॉपी करना. मार्केट से कम मूल्यों मे करोगे तो सायद आपको काम मिल जाये. मैं सोचा कौन घर पर आ कर काम कराएगा? हमारे नगर मे तो जगह-जगह फोटोकॉपी होती है. फिर भी मैं सोचा, चलो एक प्रिंटर ले कर देखते है. सन 2012 में, मैं अपने भाई से बोल कर उनके स्कॉलरशिप के पैसा से एक प्रिंटर ख़रीदा, करीबन 10000 का, परन्तु उस प्रिंटर से कोई काम नहीं मिला .बस घर मे फोटो कॉपी करने का काम आता था. फिर मैंने सन 2013 एक विज्ञाप छपवाया की कम मूल्यों मे सारे काम , हिन्दी इंग्लिश टाइपिंग और प्रिन्ट, फोटो कॉपी, स्केन... और फिर छोटे-मोटे काम मिलने लगे. इस तरह महीने मे 500 रूपी मिले. जैसे-जैसे लोगो को पता चलता गया वैसे-वैसे काम आने लगे. और मुश्किल से 2 बार ही विज्ञापन छपवा कर समाचार पेपर मे बटवाया था. और धीरे-धीरे स्कूल कॉलेज का भी काम आने लगा. और आज मैं महीने के 5 से 9 हजार कम लेता हूँ. ऐसा कोई महीना नही जिसमे मुझे 4000 से कम का पैसा मिला हो, मैंने धीरे-धीरे और काम को बढाता जा रहा हूँ. ऑनलाइन फॉर्म भरना और इंटरनेट के सारे कम करता हूँ. कलर प्रिंटर भी खरीद लिया हूँ. अब मुझे रोज पैसे मिलते है. इस तरह आप देख सकते है की मैं केवल घर बैठे काम सुरु कर के अपना खर्च निकल लेता हूँ. इसतरह मैंने अपने बुद्धि और ज्ञान और हुन्नर रूपी धन को बेच कर पैसा कमाने लगा हूँ. इसलिए मेरे विचार से दुनिया मे कोई भी चीज से पैसा कमाया ज सकता है. बस आपको समझना यह है की आपके पास कौन सा धन है, जिसे आप बेच सकते हो.
अब् आप समझ गए होंगे की आपके पास क्या धन है, और मैं किस धन को बेचने की बात कर रहा था.
फिर भी मैं इसे अपने विचार से आपको समझाना चाहता हूँ.
मानव इंसान को खुदा ने तीन सबसे कीमती चीज देकर भेजता है:-
  1. बुद्धि (हीरा)
  2. शारीरिक बल (सोना)
  3. मनुष्य का समय (चांदी)
यह कीमती चीज मनुष्य के पास हमेसा रहता है. चाहे वह विकलांग हो या बलवान, जो व्यक्ति अपने धन का जैसा उपयोग करेगा, उसे वैसा ही फल मिलेगा. जो इन तीनो चीज का उपयोग करना जान लेगा उसे आमिर बन्ने से कोई नहीं रोक सकता. आईये मैं इनको थोड़े विस्तार से समझाता हूँ.
  1. बुद्धि (हीरा) : जैस आपको पता है हर इंसान के पास थोड़ी ना थोड़ी बुद्धि या समझ जरुर रहता है. मैं भी शरीर से कमजोर होने के बावजूद मैंने अपने हुन्नर और बुद्धि (हीरा) को बेच कर पैसा कमाना सीख लिया. आप भी अपने ज्ञान को ऐसे कामो मे लगाओ की उनसे जितना हो सके आपको धन मिल जाये. हीरा ऐसा चीज है जिसे हर कोई खरीदना चाहता है. इसलिए इसे बेचने का तरीका सोचो.
  2. शारीरिक बल (सोना): जिसके पास हुनर की कमी होता है, वह अपने शारीरिक बल का उपयोग कर पैसा कमाता है. मजदुर और मेहनत गस्त इंसान इन्ही श्रेणी मे आते है. वे केवल अपने शारीरिक बल और समय के बल पर पैसा कमाता है .वह अपना हीरा (बुद्धि) का उपयोग नहीं कर पाता, इस कारण केवल साधारण जीवन मे अपनी जिंदगी गुजर देता है.
  3. मनुष्य का समय (चांदी): और अंतिम सबसे निम्न श्रेणी मे जो धन  आता है वह है आपका कीमती समय. इस समय को आप चाहे हीरा, अथवा सोना के साथ मिला कर आमिर बन सकते हो या फिर केवल सोना के साथ मिला कर साधारण जीवन जी सकते हो.
इस तरह मेरे जो लेख का उद्देश्य था, वह यह की आप भी पैसा और धन हासिल कर सकते है. बस आपको इन तीनो धन का उपयोग करना आना चाहिए. क्योकि यहाँ मिट्टी भी बिकती है.......

---शब्बीर चौरसिया