Monday, April 30, 2012

किस्मत शब्द कमजोरियों पर पर्दा है


मित्रों आज मैं आप से कुछ ऐसी बात कहने जा रहा हूँ जो की हम सब रोज बोलते हैं या कहते सुनते है ..और वह शब्द है किस्मत अर्थात भाग्य (LUCK). अधिकतर हम कहते हैं की फलाना चीज हमें मिला है तो ये किस्मत था जो हमें मिल गया ,और यदि कोई चीज हमे न मिले तो हम कहते है किस्मत नहीं था इसलिए हमे वह चीज नहीं मिला .यही बात हम दूसरों पर लागु करते है जैसे कोई आदमी लौटरी का पैसा जीत जाए तो हम कहते है की उनका भाग्य अच्छा था. बहुत किस्मत वाला था जो उनसे लौटरी  जीत गया .ऐसे ही कई चीजों के लिए हम कहते रहते है की मेरा भाग्य खराब है .हमेशा मेरे साथ बुरा होता है .भगवान ने मुझे unlucky बना दिया है ,इस कारण वह मुझे नहीं मिलता या मुझे दुःख ही दुःख मिलता है इत्यादि....


क्या किस्मत वास्तव में होता है :- चलिए अब क्या वास्तव में भाग्य जैसा कोई चीज  होता है भी की नहीं इसे जांचे .सबसे पहला सवाल है भाग्य कौन बनाता है क्या ईश्वर (भगवान) ? यदि हाँ तो भगवान ऐसा क्यों करेगा ? क्या वह पहले से हर बातों को किसी इंसान के लिए लिख कर रखता है की फलाना दिन वह क्या करेगा कब उसे वह चीज मिलेगा कब उसे वह चीज नहीं मिलेगा .कब वह मरेगा ,और कैसे मरेगा ..क्या यही कहना चाहते है .यदि हाँ तो आप खुद ईश्वर को दुष्ट प्रवित्ति स्वभाव वाला कह रहे है .वह कैसे -


यदि ऐसा है तो कोई भी इंसान का कैसा भी काम हो उसमे उनका कोई दोष नहीं. क्यों की भगवान ने ही उनके लिए ऐसा किस्मत लिख रखा है .यदि कोई गरीबी में मर रहा है तो भगवान ही चाहता है की वह गरीबी में मरे ..यदि किसी को मेहनत के बाद भी नौकरी न मिले तो भगवान ही उसके किस्मत को बिगाड़ कर रखा है .क्योंकी किसी को बहुत आमिर और ऐसोअराम की जिंदगी देता है ,तो किसी का जीवन नरक जैसा कर दता है .भगवान इतना गन्दा है की पूछ मत .जब कोई विकलांग पैदा होता है तो हम कहते हैं की उनका ऐसा ही नसीब है भगवान की यही मर्जी था इसलिए वह ऐसा पैदा हुआ .तो क्या भगवान दुष्ट स्वभाव के होते है जो एक इंसान को सुन्दर और दूसरे को बन्दर बना देता है .क्या भगवान पक्षपाती करता है .जिसको मन में आए अच्छा जीवन दे और जिसको नहीं उसे दुःख ही दुःख दे .तब तो फिर कोई चोरी ,हत्या ,टूल , बलात्कार करे तो उनमे उनका क्या दोषी ,क्यों की ईश्वर ही उनके लिए ऐसा लिख कर रखा है .और वह इंसान जैसा लिखा है कर रहा है .मतलब हम रोबोट की तरह है .ईश्वर जैसा चाहेगा वैसा हम करेंगे .क्या ऐसा कहना सही है ?

यदि कोई भगवान होगा भी तो ऐसा काम कभी नहीं करेगा .खुदा पक्षपाती नहीं करता ऐसा करने पर उसमे खुदाई नहीं होगा .न ओ किसी को रोबोट की तरह किस्मत लिख कर पैदा करेगा .क्यों की इस से सारे पापों का दोष ईश्वर पर लगेगा .दरअसल इस दुनिया में सब इंसान एक सामान है कोई पैदा होने से पहले नसीब लेकर नहीं आता .इस से यही सिद्ध होता है की हमारे जीवन में जो भी घटना होता है वह "संयोग " से होता है .उनके पीछे किसी कारण या कमजोरी का होना है ,जो की वह हमारे साथ घटता है.और किसमत या भगवान को दोष देकर हम केवल अपनी कमजोर को छुपाते है या फिर अपने मन को तस्सल्ली देते है .


क्यों करते है किस्मत पे भरोसा :- दोस्तों हम क्यों करते है किस्मत और भाग्य पर भरोसा इसका वजह साफ़ है की हम को जो चीज नहीं मिलता या जो चीज पाने में मुश्किल लगता है तो हम अपनी गलती छिपाने को किस्मत पे सारा दोस् थोप देते है .जैसे की मान लो एक लड़का है जो की नौकरी के लिए परीक्षा दिलाता है पर उनका परीक्षा में चयन नहीं हो पता .जबकि उनके कोई और मित्र का हो जाता है ,तो वह लड़का मन ही मन दुखी होता है ,और अपने मित्र के प्रति इर्षा करने लगता है .और इसी बात को सोचता है की मैं भी मेहनत किया था .पर मेरा क्यों नहीं लगा .मेरा नसीब ही खोटा है ईश्वर ने ये नौकरी मेरे लिए नहीं रखा था .मेरे किस्मत में नहीं था इसलिए नहीं मिला ..जी हाँ यही हम भी सोचते है .पर वास्तविकता ये है की उनकी कुछ कमियों की वजह से वह परीक्षा में सफल नहीं हो सका ,उनके मित्र को उन प्रश्नों का जवाब ज्यादा मालूम था जो की इस लड़के को नहीं था .मतलब की उन्होंने ज्यादा मेहनत किया था ,इस वजह से उन्हें सारे प्रश्न मालूम था .लेकिन वह अब भाग्य पे दोष लगा कर अपनी गलती नहीं देखना चाहता .उन्हें वहम है की मैं इसलिए नौकरी नहीं पा सका क्यों की मेरा नसीब खराब था .इस तरह वह अपने दिल को बहलता है .इसी तरह हर बातों को हम ले सकते हैं जो की हमे नहीं मिलता .

"किस्मत शब्द का सहारा लेकर हम अपनी कमजोरी पर पर्दा डालते  हैं ."


भाग्य के पीछे कारणों को जाने :-ये तो था मेहनत से जुदा सवाल पर क्या दूसरे चीजों में भी ये लागु होते है ..जैसे की मन लो २ दोस्त ने लौटरी का टिकट ख़रीदा पर उसमे से केवल एक दोस्त को ही लौटरी का विजेता घोषित क्या गया .अब क्या यह किस्मत नहीं था ?

बिलकुल नहीं ... चलिए मैं आपको समझाने की कोसिस करता हूँ - आप एक सिक्का लेकर उसे उछाले पर उछालने से पहले कोई भी एक भाग का चुनाव कर ले .मान लो मैं एक सिक्का लिया हूँ और यह सोच कर उछालता  हूँ की हेड (HEAD) आयेगा .पर होता ये है की टेल (TAIL) आ जाता है ,अब मैं अपने किसमत को दोष दूँगा की मेरा नसीब खराब है . :( जो लेता हूँ वह नहीं आता .ऐसी बार बार करता हूँ और एक बार मैं उसमे सफल हो जाता हूँ .तब मैं क्या कहू कहूँगा ? की मेरा किसमत इस बार अच्छा था इसलिए मैं जो सोचा वही आया ..हा हा हा .

दोस्तों मेरा ऐसा कहना मूर्खता होगा .क्यों की स्वाभाविक बात है की सिक्का में दो पहलु होंगे और जब ऊपर उछालोगे तो जाहिर है कोई एक भाग ही ऊपर की ओर गिरेगा अब बिच में तो खड़ा नहीं हो सकता न .सो इसबात को लेकर किस्मत को दोष लगाये तो गलत होगा .उसी तरह लौटरी के विजेता पर भी यही बात लागु होंगे ,जाहिर है किसी को तो जितना ही है ,सो वह नंबर किसी को मिल जाए तो इसमें भाग्य की क्या बात वह तो संयोग से हुआ .

जब कोई परीक्षा दिलाने जाता है तो हम कहते है "BEST OF LUCK" क्या ऐसा कहने से क्या उनके परीक्षा का प्रश्न उनके इक्छा के अनुसार बदल जायेगा ,नहीं .....तो फिर ? मतलब यदि वह परीक्षा में सही तैयारी नही किया होगा तो कहाँ से उनका पेपर बनेगा .और यदि सही लगन से मेहनत किया हो तो कोई भी प्रश्न आए वह उसे हल कर लेगा .इसमें किस्मत जैसी क्या बात .

एक और बात जब कोई विकलांग पैदा होता है तो हम कहते हैं की उनका ऐसा ही नसीब है भगवान की यही मर्जी था .तो क्या भगवान दुष्ट स्वभाव के होते है जो एक इंसान को सुन्दर और दूसरे को बन्दर बना देता है .नहीं दोस्तों ऐसा नहीं .दरसल उनके गर्भ धारण में ही कुछ कमी रहा होगा इस वजह से कोई इंसान में विक्रति आ जाती है .इसमें उनका भाग्य और भगवान से कोई वास्ता नहीं होता .


इसलिए दोस्तों ऐसा मत सोचो और निरास मत होना की मेरा नसीब खराब है न किसी पर दोष लगाना बस कोई चीज पाना है तो स्वयं मेहनत करो और जो चीज न मिले तो उसे भूल कर आगे बढ़ो उनसे अच्छा चीज जरुर मिलेगा .हमेशा दुःख नहीं होता न हमेसा खुशी ."यही जीवन है "


"अंत में बस मैं यही कहना चाहूँगा की हम जिसे किस्मत वाला समझते है वह वेक्ति भी अपने को किसी काम के लिए अपने भाग्य को दोष देता होगा .तो फिर वह भाग्यशाली कहा हुआ ? भाग्यशाली लोगो के साथ तो हमसा अच्छा होना चाहिए न ! "


                                 --शब्बीर  चौरसिया


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