Saturday, April 14, 2012

सच्चा प्यार




    प्यार शब्द वह चीज है जिसे हर इंसान देना और पाना चाहता है ,मगर प्यार शब्द सुनते ही हर एक के दिल में बस सबसे पहले स्त्री  या पुरुष के प्रेम सम्बन्ध ही नजर आता है ,जबकि यह जानते हुए भी की स्त्री और पुरुष के प्यार के अलावा और भी रिश्ते नाते  का प्यार होता है .लेकिन आज के दौर में प्यार शब्द बस लड़का लड़की के प्रेम की पहचान बन चूका है .चलो हम इसी बात को लेकर आज लड़का-लड़की की प्रेम कहानी और चाहत की बात करते हैं .
 
    एक जमाना था जो प्यार में मर कर लोग अपना नाम अमर कर गए है, जिसे आज हर कोई जनता है .हीर रांझे सोनी महिवाल ,साह जहा सच्चे प्यार की परिभाषा इन्ही नामो से दिया जाता हैं .सच्चा प्यार  तो इनलोग ने कर के गए  जो अपने प्यार को पाने के लिए मर चुके .  
    परन्तु आज के ज़माने में प्यार दिल से हट कर दिमाग पर आ चूका है .प्यार के लिए सर्त रखा जाने लगा है  जैसे की वह दिखने में सबसे सुन्दर हो उनके पास पैसा हो इत्यादि. और बस ए दो चीज हो तो प्यार किया जा सकता है ,चाहे उनका नेचर (वैव्हार) जैसा भी हो उनसे कोई फर्क नहीं पड़ता. आज अधिकतर लोग सुंदरता को देख कर प्यार करने लगते हैं ,ऐसे लोग सोचता है की मेरा प्रेमी सबसे अलग दिखे ,  जिसे देख के सभी पसंद करे .चाहे प्यार करने वाला सुन्दर दिखे न दिखे पर ओ जिस से प्यार करे वह सबसे सुन्दर हो....

   "मान लो हम से कोई ऐसा लड़का या लड़की मिले जो दिखने में खास नहीं दिखे ,लेकिन आप से सच्चा प्यार करता हो ,तो हम उनके प्यार को ना देख कर उनके प्यार को उनके सुंदरता से तुलना करने लगेंगे .और सुंदरता जीत जायेगा और प्यार हार जायेगा .मतलब हम उनके प्यार को ठुकरा देंगे ,क्योकि उनका सुन्दर रूप नहीं या दिखने में खास नहीं होगा ....और वही दूसरी ओर कोई सुन्दर लड़का या लड़की हम से केवल इसलिए प्यार करता हो की आप औरो से सुन्दर हो और पैसा पार्टी है, तो ऐसे में हम उनके दिखावटी प्यार को कुबूल कर लेंगे ,क्योंकी सुंदरता का मोल है .और जब हमें वो चीज मिल जाता है, तो हमें पता चलता है की सच्चा प्यार था की केवल प्यार "......!

    सच्चा प्यार ओ प्यार है जिसे पाने की चाहत हर लड़का और लड़की करता है ,की कास उनका प्रेमी उसे सच्चा प्यार दे, उनके नजरो में केवल उनका ही रूप नजर आये .और उनके लिए कुछ भी करने को तैयार हो .पर एक बात और है जिसे हर कोई सोचता है की मेरा प्रेमी मेरी सुंदरता से नहीं मेरे हर एक चीज से प्यार करे .क्योंकी कोई नहीं चाहेगा की उनका चाहने वाला इसलिए उसे प्यार करता है की वह एक सुन्दर लड़की है या Handsam लड़का है .क्योंकी यदि सुंदरता के वजह से उसे प्यार करता है तो ये प्यार नहीं केवल वासना और स्वार्थ को दर्शाता है .यदि उनकी सुंदरता चली जाये ,जो की एक सचाई है की कभी न कभी उनका उम्र के साथ  चेहरे में झुर्री आ जाये या उनका वजन बढ़ जाये ,तो इस स्थिति में उनके प्रेमी-प्रेमिका का चाहत उनके प्रति कम होने लगेगा .और फिर पहले जैसा उसे प्यार नहीं मिल पायेगा इस वजह से प्यार भरा जीवन में दरार आने लगता है .यही वजह है की हर कोई यही चाहेगा की उन्हें जो भी प्यार करे उनकी सुंदरत से नहीं उनके हर एक आदत व उनके कमियों से भी प्यार करे .

     आज लड़का लड़की प्यार में पटी क्या,प्यार के राग अलाप गाने लगते हैं ...की मैं आप से सच्चा प्यार करता हूँ ,(जैसे उनके लिए जान भी दे देगा) .यही बात लड़कियों पर भी लागु होता है .सच्चा प्यार को आज मजाक का शब्द बना लिए है जैसे I love you कहना एक प्यार का formula बना गया है वैसे ही सच्चा प्यार कह के ये दिखावा किया जाता है मनो वही उनके लिए सब कुछ है ,सच्चा प्यार का मतलब चाहे जो हो उन्हें तो बस उनको ए शब्द कह के ऐश्सास दिलाना होता है .और जब प्यार धीरे धीरे कम हो जाता है तब पता चलता है की सच्चा प्यार था की केवल प्यार ......!

    वही दूसरी ओर आज कल के युवा लड़के -लड़कियां यह सोचते है की कास मुझे कोई प्यार करता या मैं उसे से प्यार करता / करती .पर क्या वास्तव में प्यार है ? की बाहरी सुंदरता का असर है ? या फिर आज के दौर में प्यार करने का फेसन ?. क्योकि आज यही हो रहा है .आज के लड़के लड़कियों  के मन में प्यार उत्मन होता नहीं ,कराया जाता है .टी वि ,फिल्म के जरिये यह देखा जाता है की हर लड़का लड़की का एक आशिक होता है .और school और college में हर एक के पास girl friend & boy friend है .यही वजह है की जिनके पास नहीं होता वह अपने को दूसरे से तुच्छ समझता है और उनसे जलन होने लगता है .इसलिए वह भी कोई ऐसी-वैसी लड़का या लड़की को खोज लेता है जो खली हो और उनसे ही प्यार का खेल खेलकर अपने को और दुरे को धोखा देता है .और इस प्यार का सबसे बड़ा जड़ मोबाइल और इन्टरनेट है ,लोग के पास अब मोबाइल फोन है पर यदि कोई बात करने वाला नहीं हो तो ,किस से वह बात करेगा ? क्या परिवार के लोगो से ?  या भाई बहन से ?,ज्यादा से ज्यादा आधा घंटा अपने दोस्तों से पर दिन भर किसे sms और कॉल, मिस कॉल करे ? ,कोई तो हो जिस से मोबाइल का फ़ायदा उठाया जाये .क्योकि मोबाइल है  तो पैसा है , पैसा है तो boyfriend या girlfriend हो और यही सब आवश्यकता प्यार को उत्पन्न करता है .जिसे आज के नव जवान सच्चा प्यार कहकर घंटो बतियाते रहते हैं........

    पर इन सब प्यार का उदेश्य केवल टाइम पास करना ,प्यार की प्रतियोगिता को पूरा करना ,और सेक्स की भूख मिटाने  से होता है .जो एक झटके में आग की तरह जलता है और बुझ जाता है .आज कल केवल मतलब के लिए प्यार होता है ,आज के प्यार में प्यार कम स्वार्थ अधिक होता है . और इस तरह का प्यार केवल चार दिनों का होता है ,जब प्यार का बुखार उतर जाये तब पता चलता है की प्यार क्या चीज है . और ये सब प्यार का क्या अंजाम होता है इसे कहने की जरुरत नहीं. कुछ महीने या सालो बाद bracup फिर कोई दूसरी .क्या यही सच्चा प्यार है ???.

वैसे मेरे हिसाब से बिना स्वार्थ के प्यार ही सच्चा प्यार है .यदि प्यार के बदले प्यार मांगे तो यह एक तरह का लेनदेन हुआ जो की एक वस्तु के लिए किया जाता है .और प्यार कोई वस्तु नहीं जिसे ख़रीदा या बेचा जा सके यह तो दिल से उत्पन्न होना चाहिए .प्यार तो दो दिलो का मेल होता है जिसे किया नहीं जाता हो जाता है .सच्चा प्यार में वासना नहीं इज्जत की भावना होती है .मन में उनके प्रति गलत विचार नहीं आते .बस उनसे मीठी-मीठी बाते करते रहने को दिल करता है ,आँखों के सामने बस उनका चेहरा नजर आये .उनकी याद हर सांसो में  समायी हो .हर पल केवल उनकी ही याद हो .जब सामने बैठी हो तो बाते कम उनसे देखेते रहने को जी चाहे .उनमे यदि कोई बुराई भी हो तो भी उनकी कमी घटी अच्छी लगे .चाँद तारे तोड़ने की बाते करना प्यार नहीं पर चंद तारो को कैसे हकीकत में उनके कदमो में लाए ये प्यार है .मरने की बात करना आसान है पर उनकी यादो में जिन्दा रहना प्यार है .उनके पास रहकर सब गम भूल जाना प्यार है .यदि आपको प्यार के बदले उनका प्यार न भी मिले तो भी उनकी पूजा करना प्यार है ..बस सच्चा प्यार ओ है की उनकी हर बुराई व कमी उनकी अच्छाई से अच्छी लगे .सोने से पहले हो या जागने के बाद आंखे खुले तो बस उनका चेहरा देख कर.......क्या यह सच्चा प्यार है ?                                              ---शब्बीर चौरसिया


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