Monday, March 18, 2013

भक्ति का अंधापन



दोस्तों आप से मैं एक सवाल पूछ रहा हूँ की जब आप छोटे बच्चे थे तो आपको किसी चीज की आवश्यकता होती थी तो क्या आपके पिता या माँ आपको उस चीज के बदले आप से कोई दंड सहने को कहता था ? जैसे की मान लो की आप को बचपन में साइकल की आवस्यकता थी तो आप ने अपने माँ पापा से सीधे माँगा होगा  .की मुझे फलाना चीज की आवश्यकता है .तो बदले में क्या आपके पिताजी या माँ आपसे शर्त रखे होंगे की इसके बदले आपको अपने शरीर को कष्ट देना होगा ,

जैसे आप अपने पेट के बल चलते हुए एक किलोमीटर जाना होगा .या अपने स्कूल से घर तक जमीन को पेट के बल नापते हुए आना होगा जब तक आपका हाथ और घुटने छिल न जाये और खून न आ जाये . तब मैं आपके दर्द और खून को देख कर खुश हूँगा और आपकी मनचाही इच्छा पूरी कर दूँगा .क्या ऐसा ही कहा होगा आपके पिता या माँ ने ? जाहिर सी बात है नहीं ...

क्योकि आप भी एक दिन पिता और माँ बनेंगे .तो क्या आप अपने बच्चों को उनकी किसी ख्वाईस या आवश्यकता पूरी करने के बदले उसे दंड सहने को कहेंगे. जी नहीं बिलकुल नहीं ..क्योकि आप को अपने बच्चे की हर ख्वाईस या आवश्यकता जो उनके भलाई के लिए होगी उसे पूरी करने में आपको खुशी होगी न की दुःख. और जाहिर सी बात है यदि आपके बच्चे को स्कूल में पढाई के बदले रोज 4 डंडे पड़े तो आपको दुःख होगा और आप उस स्कूल के शिक्षक से शिकायत भी करेंगे की मेरे बच्चे को ऐसे तख्लिफ न दे,.


अब मैं अपने मुख्य बात पर आता हूँ की इसी उदाहरण को अब एक ईश्वर भक्ति में ले जा कर देखे,. दुनिया के हर एक संकृति और धर्म में लोग ईश्वर भक्ति में इतने लिन हो जाते हैं की ईश्वर को समझ नहीं पाते की ईश्वर दयालु है की क्रूर स्वभाव का .वे अपने इष्ट देव या ईश्वर को प्रसन्न करने को नाना प्रकार के हत्कंडे अपनाता है ,जैसे हाथ पाँव को किलो से भेदना. अपने सरीर को कोड से मारना .जीभ काट कर देवी पर चदना. जमीन में समाधी लेना .भूखे पेट कई दिनों तक उपवास रखना .

उपवास के दौरान कई कठिन नियमों को मानना.और न जाने कई ऐसे गंदे काम जिसे देख के रोंगटे खड़े हो जाते हैं ,और खून की होली खेलने जैसा हो जाता हैं. ये सब देख के ऐसा लगता है की मनो भगवान या ईश्वर में दया नाम की चीज नहीं और वह एक क्रूर स्वाभव का आत्मा है. जो इंसानों के कष्टों से खुश हो कर उनकी मुराद पूरी करता हैं.इंसान ईश्वर को भी जल्लाद का दर्जा दे कर रख दिया हैं .मनो ईश्वर दुष्ट है और उसे मनुष्यों के खून देख  खुशी होती है..


अब आप खुद सोचो एक ईश्वर के लिए ये सब शोभा  देगा? नहीं दोस्तों...ऐसा कोई भी ईश्वर नहीं जो ऐसे इंसानों को उनके आशीष के बदले कोई कष्ट करने को या दंड सहने को कहे . हम खुद सोच सकते हैं की एक ब्रम्हांड का मालिक जिनके द्वारा पूरी कायनात  बनी होगी क्या वह इंसानों से सेवा कराएगा .क्या वह इंसानों को तख्लिफ में देख खुश होगा और आशीष देगा.बिलकुल नहीं .और ऐसा है तो फिर ईश्वर के नाम पर कलंक हैं .


तो सवाल यह आता है की ये सब इंसान क्यों करता है .इसके पीछे क्या कारण हैं ..

इसके पीछे सिर्फ मुख्य तीन कारण है ---


१) पहली बात यह की इंसान यह सोचता है की मैं किस तरह भगवान या ईश्वर का ध्यान अपनी ओर करू जिस से मैं अपनी इच्छा या मन्नत को पूरी करा सकू. और वह यह भी सोचता है की यदि मैं कोई ऐसा काम करू जिस से भगवान को मेरे ऊपर दया आ जाये ताकि मुझे गारन्टी मिल सके की वह मन्नत पूरी हो जायेगा .इसलिए वह अपने शरीर को दंड देना सुरु कर देता है .और उसे मन ही मन लगने लगता है की अब तो भगवान को मेरा इच्छा मन्नत पूरी करना ही पड़ेगा .


२) दूसरी बात यह है की इंसान सोचता है की ईश्वर को उनके आशीष के बदले कुछ दू .ताकि ईश्वर को ये न लगे की बदले में मुझे क्या दिया .एक तरह से देखा जाये तो ईश्वर की कृपा का कर्ज तले नहीं दबना चाहता .इसलिए वह उनका बराबर का हिसाब देना चाहता है .


३) और तीसरा कारण यह की इंसान अपने सारे आशीष का क्रेडिट अपने ऊपर लेना चाहता है ताकि भगवान या ईश्वर  यह ना कह सके की मैंने तुझे मुफ्त में आशीष दिया हूँ .इसलिए वह लोगो की नजरो में यह दिखता है की मैं कितना बड़ा धर्मी इंसान और भगवान का भक्त हूँ जो उनके लिए कुछ भी कर सकता हूँ. इस तरह ईश्वरी आशीष को खरीद लेना चाहता हैं .


और यही वजह है की इंसान नाना प्रकार के आडम्बर में लिप्त होते जाता हैं .जबकि ऐसा कुछ भी नहीं .क्योंकी यदि इस दुनिया में भगवान या ईश्वर होगा भी तो वह इंसानों का केवल सच्चा दिल और नियत देखता होगा और न की उनसे कास्ट  करने को कहता होगा .क्योंकी जिस तरह आपके लाडले बच्चे को कष्ट सहते देखना आपको पीड़ा दायक होगा ठीक उसी तरह ईश्वर को भी आपको कष्ट में देखना पसंद नहीं होगा .यह सब मनुष्यों की सिमित बुद्धि की उपज है जिसे ईश्वर प्रेम को भी कास्ट भरा बताया गया है.

इसलिए दोस्तों आप केवल अपने मन साफ़ रखो और आपस में प्रेम रखो तो यही सब से बड़ा भक्ति और पूजा है और इनका आशीष आपको  जरुर मिलेगा .आपको आशीष के बदले कोई कष्ट या दंड सहने की जरुरत नहीं ..बल्कि प्रेम करने की जरुरत है  और उस ईश्वर के अच्छे रस्ते पे चलें की आवश्यकता है .


---शब्बीर चौरसिया


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