Wednesday, August 05, 2015

कंजूसी उतना ही करो जितना आपको लाभ हो


नमस्कार दोस्तों. आज मैं आपके लिए एक नया लेख लिख रहा हूँ जो की हमारी खुशियों के बीच "दीवार" बनती है. जैसा की मेरे ब्लॉग का उद्देश्य कम शब्दों मे अधिक बात करना है. मैं चाहता हूँ की बात चाहे कितनी भी छोटी क्यों ना हो बस उन बातो का मतलब होना चाहिए. दोस्तों आज जो लेख लिखने जा रहा हूँ उस का शीर्षक कंजूसी पर है . हर इंसान की बस एक ही तमन्ना होती है, की उसे दुनिया की सारी खुशियाँ मिल जाए. इसलिये इंसान इतना मेहनत करता है, चाहे वह मेहनत पढ़ाई लिखाई से लेकर नौकरीपेशा आदि को करता हो. और इसका एक ही मकसद होता है की अधिक से अधिक खुशियाँ को प्राप्त करे. और इन सारी खुशियों का 80 प्रतिशत आधार पैसा या धन दौलत होता है, जिसके द्वारा इंसान स्वस्थय से लेकर अपनी हर खुशियों को खरीद सकता है . लेकिन यह हर व्यक्ति के लिए संभव नहीं होता .परन्तु इस दुनिया मे जो भी लोग है अपने जीवन व्यापन के लिए कुछ ना कुछ जरुर धन कमा लेता है , चाहे वह भिखारी ही क्यों ना हो. मतलब यह की जीवन जीने के लिए धन मिल ही जाता है .



चलो यह तो हुई धन प्राप्ति की बाते .असल बात यह है की इन्ही लोगो मे से कई ऐसे इंसान भी होते है जो अपनी खुशी को पूरा करने मे सक्षम होते हुए भी, उस खुशी को दबा कर रख देते है . कहने का तातपर्य यह है की, यदि आप किसी चीज को प्राप्त करने मे सक्षम है, और आपके पास प्रयाप्त धन भी उपलब्ध है, फिर भी आप उसे खर्च करने से पहले १० बार सोचते है की पैसे को अपने खुशी के लिए खर्च करू की नहीं. और इसी कश्मकश मे वह अपनी खुशी पूरी नहीं कर पता .उसे लागत है इन खुसियो के  बदले धन की क़ुरबानी देनी पड़ेगी. और वह उस पैसे के मोह मे अपनी खुशी का गला घोट देता है. और अपने मन को तसल्ली देता है की फलाना चीज की आवश्यकता मेरे लिए ज्यादा जरुरी नहीं है. सायद आप मेरे कहने का मतलब समझ गए होंगे. चलो फिर भी एक उदहारण देता हूँ -



एक ऐसा इंसान जिसे एक स्मार्ट मोबाइल फोन की चाहत है, और उनके पास उसे प्राप्त करने हेतु प्रयाप्त धन भी है .फिर भी वह उसे खर्च करने से पहले १० बर सोचेगा की क्या यह फोन लेना उचित है? क्योकि इससे मेरे पैसे फालतू मे चले जायेगे.. इस से अच्छा मैं कुछ और खरीद लू या फिर  पैसा जमा कर के रखे रहू ताकि किसी वक्त काम आये . और इस तरह वह अपने धन को बचत करने के चलते अपनी खुशी का गला घोट देता है, और सोचता है मैंने अपने पैसे बचा कर समझदारी की है, पर कुछ ही दिनों के बाद उसकी स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के चले उसे अपने ईलाज के लिए पैसे खर्च करने पड़ते हैं, और मन ही मन सोचता है की आज मैंने पैसे बचा लिए थे तो आज काम आ गया, वरना मोबाइल खरीद  लिया होता तो कहा से पैसे लाता ...हा हा हा --- है ना कितना मजेदार !


दोस्तों पैसे अपना मार्ग खुद बना लेता है .अगर आप चाहे कितना भी धन कमा लो य बचत कर लो वह खर्च होगा ही. वह किसी ना किसी रूप मे आपके हाथो से पैसा चला जायेगा. इसलिये इसे अपने खुशियों के बीच ना आने दो. जब आप अपनी खुशी पूरी करने मे सक्षम हो, तो उसे पूरी कर ही लेना चाहिए. क्योकि यह जीवन कब तक आपके साथ है, कोई नहीं जनता .आकस्मिक मौत हो जाने पर उन पैसो का कोई मोल नहीं होगा. माना की धन की बचत बहोत जरुरी है ,पर उतना भी जरुरी नहीं की आपकी अभिलाषा पूरी ना हो पाए. क्योकि इंसान इसीलिए तो कमाता है की वह दुनिया की हर चीज प्राप्त कर सके . और आपके पास पर्याप्त साधन है, तो कंजूसी क्यों करना. चाहे खाने पीने मे हो या लेन-देन हो. जीते-जी हर खुशी पूरी कर लो. क्या पता कल वह पल आपके जीवन मे आये की नहीं .
---शब्बीर चौरसिया 

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